6/15/2019

बच्चों का टिफिन कैसा हो?

बच्चों के कल क्या और कौन सा टिफिन बनाना चाहिए? ये एक ऐसा प्रश्न है जो हर मां के जहन में प्रतिदिन आता है और वे अपने लाडले के लिए टिफिन तैयारी में जुट जाती है। टिफिन में दिए जाने वाले खाने पीने की चीजों को लेकर आज अधिकांश माताएं ये समझती है कि बस यह बच्चे की खाने की जरूरत है जिसे बच्चे को स्कूल में ब्रेक के दौरान खिलाया जाना चाहिए ।
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मगर वे भूल जाती हैं कि यह खाना बच्चे का प्रथम भोजन तो होता ही है साथ ही बच्चे को मिलने वाले पौष्टिक गुणों को भी वे टिफिन तैयार करने में भूल जाती है। और जल्दी बाजी में फाॅस्ट फूड का सहारा लेकर बच्चे को विदा कर देती है ।
हमे यह सोचना चाहिए कि बच्चा चार पांच घंटे प्रतिदिन स्कूल में बिताता है और इस दौरान उसे मानसिक और शारीरिक मजबूती प्रदान करने वाले आहार की जरूरत पड़ती है जो उसकी पूरी पढ़ाई लिखाई को प्रभावित करते हैं। कुल मिला कर यह कहा जाए कि आहार स्वास्थ्य वर्धक होना चाहिए न कि पेट भरने वाला । कुछ माताओं की शिकायत होती है हम अच्छा बनाने के बावजूद भी बच्चा टिफिन नहीं खाता है और टिफिन वैसे ही भरी हुई वापस घर ले आता है। तो आईए इन्ही बिन्दुओं पर ध्यान रखते हुए हम चर्चा करते हैं । बच्चे का टिफिन बाॅक्स कैसा होना चाहिए? और मनावैज्ञानिक कारणों से जानने की कोशिश करते हैं कि बच्चा टिफिन क्यों नहीं करता है?

स्वास्थ्य वर्धक टिफिन बाॅक्स क्यों जरूरी है?


बच्चों को अगर हम चाहते है कि पढ़ाई लिखाई के साथ साथ खेलकूद में भी अवल्ल रहें तो सबसे इसकी शुरूआत उनके खान पान से ही करनी चाहिए। बच्चे का पेट भरा होगा तथा उसे पूरा पोषण मिल रहा होगा तो स्कूल में पूरे समय गतिशील रहेगा।
उचित पोषण मिलने वाले बच्चे बिमार कम पड़ते हैं लिहाजा वे पढ़ाई और दूसरी गतिविधियों में भी अव्वल रहते हैं इसीलिए उनके टिफिन में पौष्टिक गुणों से भरपूर खाने पीने की चीजें दीजिए न कि फाॅस्ट फूड। फाॅस्ट फूड में केवल कार्बोहाईड्रेट्स और शुगर होता है जो मोटापा ही देते हैं । उसे चाहिए प्रोटिन, विटामिन  तथा मिनरल। 
बच्चों में दूसरों बच्चों को देखकर ज्यादा खाने की होड़ लगती है और इसी होड़ का फायदा उठाने के लिए उन्हें अधिकाधिक पौषिक आहार दीजिए। और टिफिन बाॅक्स को देखकर बच्चों में खाना खाने की प्रवृति बढ़ती जाती है। 
चार से पांच घंटे बच्चा स्कूल में बिताता है तो उसे ऊर्जा से भरपूर खाना चाहिए ताकि वह पूरा दिन ऊजावान बना रहे। अगर उसे बराबर पोषण नहीं मिलेगा तो वह सुस्त ही रहेगा । इसी दशा में उसका मन पढ़ाई में नहीं लगेगा । इसी लिए टिफिन में उसे पैकेट बंद चीजे बिलकुल न दे और न ही फाॅस्ट फूड की तरफ धकेलें 

बच्चों का टिफिन कैसा हो?

उक्त बातों से इसीलिए जरूरी है कि बच्चों को स्वास्थ्य वर्धक,पौष्टिक खाना मिले । बच्चों का टिफिन तैयार करते समय माताओं को निम्न बातों का ख्याल रखना चाहिए। अक्सर माताओं की यह शिकायत होती है बच्चा टिफिन नहीं खाता । निम्न उपाय करें और फिर देखें अपने बच्चे में बदलाव 
एक ही प्रकार का खाना रोज रोज न दें ।
क्यों कि इससे बच्चा तो बच्चे बड़े भी बोर हो जाते हैं । और वे खाने में रूचि नहीं दिखाते । इसीलिए एक ही प्रकार के खाना देने से बचें। अलग-अलग प्रकार के खाना टिफिन में आप देंगें तो उसे बच्चा चाव से खाएगा । उसके लिए हमेश कौतूहल बना रहेगा कि आज मम्मी ने क्या बनाया है? और इससे उसमें हर प्रकार के खाने के शौक जागेंगें।टिफिन बाॅक्स का आकार रंग प्रतिदिन या दो तीन दिनों में बदलें । जिससे बच्चे में नए टिफिन पर नया खाना देखने को मिलेगा। और वह टिफिन खाएगा। बच्चे खाने को अलग-अलग ढंग से लेना पसंद करते हैं । अगर आप पराठे ही देना चाहते हैं तो पराठों की आकार बदले जैसे चांद वाले पराठे चांद के आकार पर । तिकोन वाले पराठे, तारों के आकार वाले पराठे इत्यादि  इससे उसमें ये ललक पैदा होगी कि इसका स्वाद कैसा होगा। और वह उसे खाएगा

रंगों का बच्चों  के जीवन पर असर 


रंगों का बच्चों के जीवन पर बड़ा असर पडता है अतः खाने पीने की चीजों में भी वह रंग ढूढता है । हरा रंग पालक है तो लाल रंग बूंदी या टमाटर की चटनी सलाद, बादाम फ्राई। इत्यादि बे्रड भी दे ंतो ब्राऊन ब्रेड में वह रंग खोजेगा और खाएगा भी 
बच्चों मंे फलों के प्रति रूचि बचपन से डालिए। इससे होगा यह उसमें फलों को खाने की दिलचस्पी बढ़ेगी और वह फलों से मिलने वाले पौष्टिक गुणो से भरपूर रहेगा। इसके लिए बच्चे को दो प्रकार के टिफिन बाॅस्स दीजिए । एक में वह लंच के समय खाए और दूसरा फलों वाला जिसे वह बे्रक में या स्कूल से लौटते समय खाए। 
बच्चों के आहार पांच प्रकार के खाने को अवश्य शामिल कीजिए ये हैं दूध, दूध से बने पदार्थ, मांस-मछली अंडे अगर मांसाहारी है तो , दाल, हरी सब्जियां और फल। 
इन बातों का ख्याल रख कर माताएं बच्चों में खाने पीने के प्रति रूचि पैदा कर 
सकती हैं । और अगर फिर भी बच्चा खाने में रूचि पैदा नहीं हो रही है तो डाॅक्टर से तुरंत मिले 


6/06/2019

ZOMATO: online food restaurant

घर बैठे अपने पसंदीदा होटल या रेस्टोरेंट का खाना खाना होतो अब जगदलुपर में होटल तक जाना जरूरी नहीं है और न ही किसी को खाना मंगाने के लिए तकना पड़ेगा। आपको स्मार्ट फोन ये काम कर देगा। और जोमेटो जो जगदलपुर में आ चुका है वह खाना घर तक पहॅुचा देगा। वो भी आपके पंसदीदा होटल से ।

पिछले महिने जगदलपुर शहर में लाल टी-शर्ट पहले हुए बाईक पर सवार लोगों को देखा तो जानकार कहने लगे अब जोमेटे भी यहां आ गया।  इन लाल टी-शर्ट बाईक सवारों की पहचान यह है कि इनके बाईक के पीछे एक बड़ा बैग लटका होता है और टी शर्ट पर लिखा होता है-जोमेटो

जानते है जोमेटो क्या है?


यह online खाना घर तक पहॅुचाने के लिए बनाई गई एक कम्पनी है जिसकी दुनियां में 24 देशों पर शाखाएं सफलता पूर्वक काम कर रहीं है और भारत के 12 चुनिंदा शहरों में कुल 42000 से ज्यादा बड़े होटल्स आते है । 
मजे की बात है इसकी स्थापना आईआईटी के भूतपूर्व छात्रों ने सन 2008 में की जिनके नाम हैं दीपेन्द्र गोयल और पंकज गद्यहे । शरूआत में इसका नाम फूडी बे था जिसे बाद में जोमेटो किया गया । 
foodie Bay renamed as Zomato
इन्हें इस प्रकार की कम्पनी बनाने के आईडिया तब आया जब इन्होंने ने एक कम्पनी में काम करते हुए सहायोगियों द्वारा अलग-अलग होटले के मेन्यु से खाने की जरूरतों को देखा।
कहते है एक आईडिया जो बदल कर रख दे आपकी दुनियां बस यही हुआ इन इंजीनियरिंग डिग्री धारियों के साथ । इंजिनियरिंग की डिग्री के बाद इन्होंने जो व्यवसाय अपनाया वो बिल्कुल अगल थो जिसकी उन्होंने आईआईटी दिल्ली में पढ़ाई की थी। 
बहरहाल ,इसका मुख्यालय दिल्ली-हरियाणा की सीमारेखा पर स्थित गुडगांव में है। छोटे से शुरूआत की गई कोशिश और सतत प्रयास का परिणाम है कि आज  जोमेटे का कारोबार काफी फैल चुका है और इसके अन्तगर्त वर्तमान में 4000 से अधिक कर्मचारियों का स्टाफ काम कर रहा है। 

जानते है इसकी फंडिग के बारे में


2008 से अब तक जोमेटो की कुछ फंडिंग को देखें तो यह 223.8 मिलियन डाॅलर तक हो चुकी है जिसमें विश्व की नामी गिरामी कम्पनियां निवेश कर चुकी है जिनमें सेक्वीओ कैपिटल तथा टैमासैक है और जोमेटे की कमाई फिलहान 113 मिलियन अमेरिकन डालर है।

कैसे कमाता है जोमेटो

जाहिर है घर तक आपको सेवा देने वाली कम्पनी जोमेटो खुद कैसे कमाती है ये जानने की इच्छा तो है
इसमें नाम आता है विज्ञापनों का । जोमेटो अपने प्लेट फार्म या एप/साईट पर दिखाए जाने वाले होटलों के विज्ञापनों से कमाता है ।
फिर घर तक खाना पहुॅचाने के एवज में ग्राहकों से कुछ पैसा वसूलती है, जो 10 प्रतिशत तक होता है 
फिर इसके बाद इसकी कुछ योजनाये है जो जोमेटो गोल्ड और जोमेटे ट्रिट कहा जाता है , इसके माध्यम से भी यह कमाई करती है।

जोमेटो गोल्ड एक लायलिटी कार्यक्रम है जिसके माध्यम से ग्राहको को चुनिंदा होटलों से लायलिटी मिलता है
और जोमेटे ट्रिट में कुछ मीठा फ्रि में देने के की योजना है जिसके माध्यम से भी जोमेटो कमाई करता है। इसमें  ग्राहकों को चुनिदा होटलों से खाना मंगाने पर मुफ्त में मीठा देने की योजना है।

जोमेटो के संस्थापक ने साक्षातकार में बताया कि भारतीय 800 से 1000 हजार रूपये प्रतिदिन खाने में औसतन खर्च करता है। 
जोमेटो के अलावा और भी कम्पनियां है जो घर तक खाना पहुचने का काम करती है , जैसे उबर ईट, फ़ूड पांडा और स्वीगी 





5/14/2019

Search Engines सर्च इंजन क्या है?

आज के युग में सूचनाओं के लिए जिस पर हम आश्रित है वह है सिर्फ और सिर्फ गूगल,अगर आपको किसी विषय की पढ़ाई या नोट्स चाहिए या किसी उत्पाद के बारे मे पूरी जानकारी चाहिए, कोई खाना बनाने की रेसिपी के बारे में जानकारी चाहिए,
किसी जगह विशेष के बारे में डिटेल चाहिए  या अन्य कोई भी सूचनाएं जो ऐसा लगता है आपको मदद दे सकती है तो बस एक ही साधन आज हमारे पास होेते है वे है गूगल। आज के दौर में गूगल एक ऐसा माध्यम है जो आपको अपडेट रखता है। ऐसे इंटरनेट की भाषा में कहें तो सर्च इंजन है जो आपको सूचनाएं देने का काम करता है। ये सूचनाएं विडियो, लिखित में या फोटो के माध्यमों से हो सकती है।
सूचनाओं के प्रकार को हम संक्षेप में समझे तो या तीन माध्यमों से ही हो सकती है

विडियो जिसके लिए प्रचलित आज youtube है और लिखित में किसी की सूचना चाहते है तो उसके लिए गूगल में कई तरह की वेज साईट है जो आपको सूचनाएं देते है। गूगल फोटो आपको सचित्र मांगी गई सूचनाएं आप तक पहूॅचाता है।  क्या आप जानते है कि गूगल के अलावा भी नेट पर कुछ ऐसे सर्च इंजिन है जो सूचनाओं का आदान-प्रदान करते है।

जानते हैं ऐसे ही कुछ सर्च इंजन के बारे में 

सर्च इंजन क्या है? 


यह एक ऐसा साॅफ्ट वेयर है इंटर नेट पर उपलब्ध सूचनाओं को तलाश करने में हमारी मदद करता है। जिसके पते आप नहीं जानते और जो आपकी रूचि के विषय होते हैं ऐसे वेब पेजों को ढूँढने में सर्च इंजन नामक साॅफ्ट वेयर आपकी मदद करती है। इसका विकास विश्व में मौजूद कम्पनियां करती है जैसे गूगल नामक सर्च इंजन को गूगल कम्पनी ने बनाया है ।

अब जानते है और ऐसे कितने सर्च इंजन है।


गूगल (Google)

तो इस प्रकार सर्च इंजनों के कई प्रकार हैं जिसमें गूगल एक है ।यह दुनिया की सबसे बेहतरीन और विश्वसनीय सर्च इंजिन है  इसके बारे में आप सभी जानते होगें । गूगल आपको अपने चुनिंदा विषयों को फोटो, विडियो और टैक्स यानि लिखित में जानकारी देता है । इसमें खास बात यह है कि यह विश्व की कई भाषाओं के अलावा भारतीय भाषाओं में भी आपको सूचनाएं देता है। यह आप काफी प्रचलित है। हमें गर्व होना चाहिए कि एक भारतीय सुंदर पिचाई गूगल नामक कंम्पनी के सीईओ बने है। https://www.google.com/ इसका एड्रेस है 

याहूः- (Yahoo)

इसे जानने के लिए आप https://in.yahoo.com/?p=us  टाईप करें तो आपको एक पेज खुलेगा जिसपर आप अपनी रूचि के अनुसार विषय चुनकर सर्च कर सकते हैं । इसमें प्रत्येक विषय के
लिए अलग-अलग श्रेणियां बनी हुई हैं । जिसे के एक क्लिक पर ही खोजा जा सकता है। याहू के माध्यम से आप सर्च करके इसके डायरेक्ट्री का चुनाव कर सकते है। तथा इसके सर्च बाॅक्स में वांछित विषय पर आधारित की वर्ड के द्वारा भी सम्बन्धित सूचना एकत्र कर सकते है।
इसके आलावा विश्व की टॉप 10 सर्च इंजिन में जो नाम आते है वे है 


ये आज काफी प्रसिद्ध सर्च इंजन है जिसमे विषयवार जानकारी मिलती है / 


इसमें हर विषय की अलग अलग श्रेणिया बनी होती है जिसमे रूचि के आधार पर आप चयन कर सकते है 

Bing  
ये आज काफी प्रसिद्ध सर्च इंजन है जिसमे विषयवार जानकारी मिलती है , जो कई मायनो में महत्वपूर्ण है , यहाँ फोटो, वीडियो और text के रूप में जानकारी दी गयी है / 



इस सर्च इंजिन में प्रश्न कर अपनी जिज्ञासा को शांत किया जा सकता है / ये इसका जवाब आपको पाठकों द्वारा ही मिलता है / 

yahoo

Excite


यह कई विषयोें पर आधारित सर्च के परिणाम प्रदार्शित करता है। साथ ही यह वाक्य के एक समूह जैसे वाक्यांशो या प्रश्न के आधार पर भी परिणाम प्रदर्शित करत सकता है। 



लायकोस:-  (Lycos)

इसका यूराल  http://www.lycos.com/ - है लायकोस एक विशाल सर्च इंजिन है जिसके अंदर लाखों की संख्या में डाटाबेस समाहित हैं । यह कई विषयोें पर आधारित सर्च के परिणाम प्रदार्शित करता है। साथ ही यह वाक्य के एक समूह जैसे वाक्यांशो या प्रश्न के आधार पर भी परिणाम प्रदर्शित करत सकता है। 

Wolframe:-


यह भी सर्च करने के लिए विशाल इंजन है । इसके माध्यम से किसी देश विशेष को चुनकर वहां की जानकारी सर्च कर सकते है।

डाॅग पाईल:-(Dogpile)


इस सर्च इंजन का निर्माण अमेरिका के डिजिटल इलेक्ट्राॅनिक्स काॅर्पोरेशन के द्वारा बनाया गया है। http://dogpile.com - है इस सर्च इंजन में कई प्रकार के अच्छे सर्च इंजन को भी जोड़ा गया है। 
इसका यूराल

हाॅटबाॅट Hotbot


यह आपको सर्च इंजन आपको सर्च के करने के विकल्प के साथ खुलता है । इस विकल्प में दूसरे सर्च इंजन भी आते है। वे हैं- इंकटाॅमी intomi, google और askjeevs । इनमें से किसी भी विकल्प का चयन करके अपने सर्च को आप पूरा कर सकते हैं । इसका यूराल https://www.hotbot.com


एक्साईट  यह पूरी तरह पर्सनालाईजेस्ड वेब पोर्टल है , इसके अंतर्गत वित्त, पर्यटन, खेल-कूद तक के विश्व-स्तरीय सर्च सुविधाएं हैं इसे http://www.excite.com/  यूराल पर सर्च पर टाईप करके देखा जा सकता है। 

ममा (mamma)


यह सभी सर्च इंजनों की माँ मानी जाती है । यह अपने बेहतर परिणामों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यह एक मेटा सर्च इंजन है। इसका यूराल http://www.mamma.com है ।

 




4/26/2019

These Jobs are in Danger ये नौकरियां है खतरे में !

आज  40 साल या उससे अधिक के हर व्यक्ति को याद होगा कि 1990 के दशक में किस प्रकार वे दूर दराज क्षेत्रों में रहने वाले अपने रिश्तेदारों से महज कुछ मिनट बात करने के लिए फोन बुथ पर घंटों लाईन लगाकर खड़े रहते थे । वो दौर भी याद होगा जब सेकेण्ड के हिसाब से उन्हें बात करने का पैसा देना पड़ता था। 40 के पहले वाली पीड़ी जो आज मोबाईल और इंटरनेट के युग में जी रही है उसे यह बात सुनने में अजीब लगे पर ये सच है कि उस समय हर गली मोहल्लों में मौजूद पीसीओ (पब्लिक कॉल ऑफिस ) खुले होते थे जहां लोगों की लाईन लगी होती थी वे प्रत्येक काॅल जो तीन मिनट का होता था - दो रूपये देना पड़ता था। और बीएसएनएल ही एक मात्र सहारा था । आज की मै बात करू ऐसे पीसीओ नज़र ही नहीं आते है। उनका धन्धा अब विलुप्त हो चुका है। मगर उस दौर एक जबर्दस्त धन्धा हुआ करता था।
Automated Car

खैर मै बात कर रहा हुॅं उन धन्धों की जो आने वाले समय में ऐसे ही खो जाएगें और उनके स्थान पर आ जाएंगे नए तकनीक आधारित धन्धे । 
जानते है कि एक जमाने में Kodak का बड़ा बोलबाला हुआ करता था , इसमें 1,70,000 कर्मचारी काम करते थे और  पूरी दुनियां मेें फोटोग्राफी में बड़ा नाम था, यह कम्पनी पूरी दुनियां में 85 प्रतिशत फोटो पेपर बचती थी। फिर कुछ ऐसा हुआ कि डिजिटिल फोटोग्राफी आ गई और Kodak का धंन्धा बैठ गया जाहिर है डिजिटल फोटोग्राफी कोडक की फिल्म फोटो से काफी सस्ती हुआ करती थी। तो कोडक फिल्म खरीदने से लोग करतराने लगे और यह कम्पनी बैठ गई ।
यही हाल एचएमटी घड़ी, बजाज स्कूटर,डायनोरा टीवी, मर्फी रेडियो नोकिया मोबाईल, राजदूत बाईक और एम्बेसेडर कार के साथ हुआ । 
दरअसल, इनकी गुणवत्ता में कोई कमी नहीं थी, न ही इनके उत्पादन में /
कमी आई बस इन कम्पनियों के उत्पाद समय के बदलते दौर से सामंज्य नहीं रख पाये। आने वाले समय में आज के प्रचलित 80 प्रतिशत उद्योग धंधे ही बंद हो जाएंगे फिर उनकी जगह होगी तकनीक आधारित कामकाज यानि एक्पर्ट ही बचेगें,  इसलिये थोड़ी बहुत जानकारी आज के लिए पर्याप्त नहीं है।
ऐसे कुछ कामों की सूचि दी जा रही है जो आज ज़िदा तो हैं मगर भविष्य नहीं है। सम्भवतः 2030 में यह स्थिति आ जाए। और आज दिखाई देने वाले नौकरियां पूरी तरह से मिट जाए ठीक उसी तरह जैसे STD /PCO का कारबार खत्म हो गया । या फिर 115 सालों का टेलीग्राम भी खत्म हो गया । कारण उसकी जगह पर संदेश भेजने और लेने के कई साधन आ चुके हैं।  Foundation of Young Astralian (FYA) के युवा आने वाले दस से 15 सालों के लिए इस बात का प्रशिक्षण पा रहें है कि कौन सा कार्य स्वचलित (Automated)  हो जाएगा।
एक नज़र उन कामकाजो पर

इनमें से एक है ड्राईवर

आने वाले समय में स्वचलित गाड़ियां आ जाएंगी। और उन्हें आप अपने सिस्टम से सेट करके नियत स्थान डालते ही आपको स्वतः ही ट्रेफिक से बचाते हुए नियत स्थान पर छोड़ आएगी।
फिर आपके पास अगर ड्राईवर नहीं है तो Ola तथा उबर जैसी कम्पनी आपके लिए घर पहॅुच सेवा दे रही है । इसमें ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्सटम यानि जीपीएस लगा होता है जिससे आपके लोकेशन की बराबर माॅनिटरिंग होती है।  एक ही रस्ते पर जाने वाले दो राहगीर अगर अपना भाड़ा इसमें शेयर करते है , तो बाईक से भी आपको ये सस्ती पडे़गी। फिलहाल ये सेवा महानगरों में जारी है।

Travel Agent 

जिस हिसाब से मेक माय ट्रिप,(make my trip) यात्रा, ट्रिवागो(Trivago) इत्यादि का विकास हो रहा है और इनकी उपयोगिता बढ़ती जा रही है । उसे देखकर तो यही लगता है आप अपने टिकट की बुकिंग , होटल्स की बुकिंग इत्यादि के लिए किसी एजेण्ट पर निर्भर नहीं रहना होगा। अब तो बड़े होटल्स अपने वेब साईट पर ही ये आप्शन दे रहें हैं जिससे आप अपने मनपसंद के होटल को चुनकार अपने बजट अनुसार बुक कर सकते हैं । 

कैशियर्स

जब लेन देन कैशलेस हो जाएगा तो कैशियर्स की जरूरीत ही नहीं पड़ेगी । मैकडाॅनल्ड के रेस्टोरेन्ट में आप यह देख सकते है। साथ ही प्रत्येक दुकानों में आज कार्ड पेमेंट, और कई तरह के ई वाॅलेट ने यह काम और भी आसान कर दिया हैं। जैसे पेटीएम, गूगल पे इत्यादि। अब तो यात्रा के दौरान आपको पैसे लेकर जाने की जरूरत नहीं है कही भी एक छोटा सा कार्ड या सिर्फ मोबाईल फोन ही काफी है आपके खरीदारी के लिए। तो ये धन्धा भी गया समझो। 

लाईब्रेरियन

अब किताबें डिजीटल में आ चुकी हैं । आप अपनी मनपसंद किसी भी किताब को अपने मोबाईल,कम्प्युटर, या आईपैड पर पढ़ सकते है। अमेजान ने इसकी शुरूआत कर दी है । ई बुक का इसका एक अलग सेक्शन ही है ।

पोस्टमैन

इसकी शुरूआत तो जैसे हो चुकी है । इसके स्थान पर ईमेल ने ले लिया है। पुराने समय में पोस्टमेन के द्वारा लाया गया पत्र कहीं खो जाने या फट जाने का डर हमेशा बना रहता था। Money Order का चलन तो जैसे खत्म हो चला है लोग अब ऑन  लाईन ही पैसे भेजते सुनने में आते है ।

बैंक कर्मचारी

बैंक तो पूरी तरह से बंद नहीं होगें अलबत्ता उनके स्थान पर बैंकों की संख्या कम हो जाएगी । और ग्राहक ही बैंकर्स बन कर अपना खाता खुद देख लेगें। उन्हें जो जरूरत होगी वे स्वयं Online  कर सकेगें। इसकी भी शरूआता हो चुकी है। छोटे छोटे बैंक तो बंद हो चुके है या फिर किसी बड़े बैंक में इनका सम्मिलन हो चुका है। जैसे हाल ही में  Bank of Badoda, Dena Bank and Vijya Bank  तीन तीन बैंक जुड़ गए।

कपड़े उद्योग में काम करने वाले कर्मचारी


इनका स्थान अब मशीने करने लगी है । जैसे रंगाई, छंटाई इत्यादि तो अब ये काम भी हाथ से गया समझो
मगर निराश होने की जरूरत नहीं है क्या आपने कभी सोचा था कि टीवी चैनल्स की भरमार होगी , या मोबाईल रिपेरिंग शाॅप गली कूचों में हमारे यहां दिखेंगी। ठीक उसी तरह अभी 85 प्रतिशत ऐसे अवसर ऊभर कर आने वाले है जिनका हमें अभी ज्ञात नहीं हैं। जरूरत है अब हमें योग्यता के अलावा कौशल युक्त होना होगा। योग्यता के मायने कौशल के बिना बेकार हो जाएंगे। और देखिएगा।

एक दिन कौशल विकसित देश ही तरक्की करेगा।कुछ ऐसे भी अवसर हैं जिनका स्थान ठीक ठाक नहीं रहेगा। 
इनमें से एक है शिक्षक का

आज हर आदमी आपने आप में एक शिक्षक है। और उसके पास सूचनाओं का भंडार है तो शिक्षकीय कार्य पर भी खतरा मंडरा रहा है। अगर मै स्कूली शिक्षा की बात करू तो ऐसे आज कई लर्निग एप है जो 100 शिक्षकों के बराबर किसी विद्यार्थी को ज्ञान दे रही है ।
इनमें से एक एप है By Ju's जिसका आजकल शाहरूख खान खूब विज्ञापन कर रहें है । यह इस एप  की मदद से बच्चे किसी भी विषय की जिज्ञासा या ज्ञान पा सकते है उसे ट्यूशन जाने की कोई जरूरत नहीं हैं
BY JU"S Learing App
अगर आप किसी आईआई ,NEET जैसे परीक्षा की तैयार करनी हो तो विद्यार्थी एम लर्निंग नामक एप का सहारा ले सकता है । उसे ट्यूटर की  जरूरत नहीं है। इसी तरह उन ऐप और साईट के बारे में बता रहें है जो शिक्षकों की जगह ले चुके हैं।

Udemy
यह एक ऐसा ऐप है जो आपको हर तरह की शिक्षा देता है और प्रत्येक शिक्षा के लिए पैसे लेता है । मिसाल के तौर पर आप संगीत सीखना चाहते हैं तो संगीत भी सीख सकते है।
इसी से मिलता जुलता एक ऐप है लिंडा यह महिने दर महिने एक ट्यूटर की तरह आपसे पैसे लेगा। और आपको हर तरह का ज्ञान देगा। हर विषय का ज्ञान देगा। 10 दिनों का ज्ञान यानि डेमो क्लास मुफ्त भी देता है लिंडा।
अगर आप ये सब ज्ञान मुफ्त में पानो चाहते है तो एक ऐप खान अकादमी एक बार जरूर ट्राई करें।
TED
यह विचारों के आदान प्रदान का अच्छा ऐप है ।हांलाकि इसकी एक वेबसाईटी भी है जिसमें आप लाॅग इन करके अपने विचार रख सकते है। यानि अपना ज्ञान रख सकते है
LUMOSITY 
दिमागी कसरत कराने के लिए यह एक उपयुक्त ऐप है । इससे अपने दिमाग की तीत्रता किसी भी विषय पर परख सकते है। ठीक वैसे ही जैसे स्कूलों में टेस्ट लिया जाता है। और फिर नम्बर दिए जाते हैं
GOODREAD
यह हर प्रकार की बुक आपको डिजिटल फार्म में देगा। यह अच्छी किताबों का फेसबुक है। इसके पूरी दुनियां में 40 मिलियन ग्राहक हैं । एक बार जरूर आजमाईए। 
विदेशी भाषा सीखने के लिए डो लिंगो नामक एप  है। 
Stydy Blue
यह मजेदार ऐप है। अगर आप अपनी क्लास चूक गए है और टीचर ने आपको होमवर्क दिया है किस विषय पर तो यह ऐप आपकी मदद करेगा। आपको वह पाठ याद कराएगा जिसकी तैयारी आपको करनी है। 
इसके बाद नम्बर आता है विकिपीडिया और यूट्यूब का। इसके बारे में तो सभी भली भांति जानते हैं।
उम्मीद है यह ब्लाॅग आपको पसंद आया होगा अपनी टिप्पणी हमें अवश्य दीजिए।  

3/31/2019

History of Indian Coins and currency

सिक्कों का इतिहास

अगर प्रचीन इतिहास पर गौर करें तो सिक्कों का चलन भारत में 600 ई.पू. से है और अलग-अलग साम्राज्यों ने इसे अपने अपने हिसाब से जारी किया था।  राजाओं ने अपना साम्राज्य विस्तार को दर्शाते हुए कई सिक्के जारी किए हैं । हम आधुनिक भारत में सिक्कों के बारे में बात करते है। जगदलपुर निवासी दीपका दास जो पिछले 25 वर्षों से भारतीय विदेशी सिक्के एवं नोट का संग्रह करते आ रहें है -उनसे मिली जानकारी हमें काफी दिलचस्प लगी। और उनसे हुई एक संक्षिप्त मुलाकात में जो जानकारी आधुनिक सिक्कों के इतिहास के बारे में मिली है वे इस प्रकार हैं।  ।

  
 चन्द्रगुप्त मौर्य के जमाने में सोने और चांदी के सिक्के चला करते थे आज यह भले ही अविश्वसनीय लगे मगर आधुनिक भारत में सिक्कों का सफर भी कम दिलचस्प नहीं है। 
ब्रिटिश जमाने में सिक्का 19 अगस्त 1757 ई. में बना था तब ब्रिटिश सरकार ने इसका उपयोग कोलकत्ता में किया था। जाहिर है ब्रिटिश राज था तो अंग्रेजों  ने ही किया था। फिर इसे बाद में बंगाल के मुगल प्रांत में भी इसे चलाया गया। अंग्रेजों ने बंगाल के नवाब के साथ संधि कर के फिर एक टकसाल(जहां सिक्का बनाया जाता है) बनाया गया। ब्लैक होल से लगी इमारत में यह टकसाल 1791 तक चला। 
चूंकि प्लासी की लड़ाई जीतने बाद अंग्रेजों को जब बंगाल,बिहार के व्यापारिक अधिकार मिल गए तो वे इन सिक्कों को इन जगहों पर खपाने लग गये। 

भारतीय सिक्के- 


आजाद भारत में पहला सिक्का 1950 में बनाया गया । तब तक भारत में ब्रिटिश सिक्के ही चलन में थे। भारत में डेसिमल सिक्कों का चलन 1957 से शुरू हुआ। दीपक बताते हैं कि 1 रूपया 16 आना यानि 64 पैसों से मिलकर बनता था। 1 आना का मतलब चार पैसों से था।
भारत में डिसीमल और नान-डेसिमल दोनों ही प्रकार के सिक्के चलने लगे थे।
  • कहने का तात्पर्य है कि कुछ समय तक भारत में आना सिस्टम चलने लगे । और एक आना 2 आना 1/2 आना से पूरी खरीदारी हो जाती थी। 16 आना मिलकर 1 रूपये बनता था। 
  • उसके बाद पैसों का चलन आया 1 पैसा 2 पैसा 3 पैसा 5 पैसा 10 पैसा 20 पैसा 25 पैसा 50 पैसा के सिक्को का चलन लम्बे समय तक था। 1 पैसा का सिक्का 1957 से 1972 तक चले 2011 में सरकार ने इसे पूर्ण रूप  से बंद कर दिया। 
  • वैसे ही 1964 से 1972 तक 3 पैसे के सिक्के चले थे और  1957 से 1994 तक पांच पैसे के सिक्के चले थे। इसे भी सरकार ने 2011 में चलन से बाहर कर दिया। 

दीपक के मुताबिक आज जो सिक्के भारत में ढाले जा रहें है उनमें कापॅर-निकेल,स्टेनलेस स्टील, और एल्यूमिनियम का इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • 1 रूपये का सिक्का 1962 से है जो आज तक चल रहा है । मगर उसकी साईज छोटी पड़ गई है। 
  • 2 रूपये का सिक्का 1982 से चलन में आया और 5 रूपये का सिक्का 1992 से इसके बाद 2006 से सरकार ने 10 रूपये का सिक्का जारी किया। जो आज तक जारी हैं । 

अब  किसी न किसी अवसर की याद में जारी किए गए सिक्कों की भरमार होती है। सिक्कों में इस्तेमाल किए गए धातु उसकी खनक अलग दर्शाती है। 
सिक्कों के अलावा नोट का भी चलन भारत में काफी लम्बा है। 

प्रथम विश्व युद्ध में मेटल की कमी से जारी किए गए नोट को हरवाला कहा जाता था। 
द्वितीय विश्वयुद्ध के समय में सिक्के ढालने के लिए मेटल की कमी की वजह से टोकन करेंसी बनायी गयी थी । जो प्रिंसली  राज्यों ने जारी किया था। वे राज्य  थे - गुजरात, राजस्थान, बलूचिस्तान, और मध्य भारत । 

भारत में करेंसी। 

भारत में पहला नोट 1935 में छापा गया और इसी वर्ष रिर्जव बैंक ऑफ़  इंडिया की स्थापना हुई थी। आजादी के पूर्व छपे इस नोट में जार्ज छठवे का चित्र अंकित था और यह पांच रूपये का था। फिर आजादी के बाद उसमें  फेरबदल किये गये । और उसकी जगह अशोक चक्र अंकित किया गया । पहला आजाद भारत का नोट 1 रूपये का था। 

फिर 1969 में  पांच और 10 रूपये को नोट छापे गए जो महात्मा गांधी के जन्म शताब्दि वर्ष को दर्शाता है। और 40 साल तक 10 रूपये को नोट में नाव का चित्र चलता रहा। 
1959 में भारतीय हज यात्रियों के लिए एक खास नोट
जारी किए गये जिसे सउदी अरेबिया के नोट से बदलने में सुविधा हो सके।
1946 में महात्मा गांधी का खीचां गया  चित्र भारतीय नोट की पहचान बना। किसी  एक अज्ञात फोटोग्राफर ने लिया था।
1917-18 को हैदराबाद के निजाम को भी भारतीय नोट में जगह मिल चुकी है 
1996 से महात्मा गांधी के चित्र वाले नोट रिर्जव बैंक जारी करता आ रहा है। 
अब जानते है नोट के बारे में कुछ खास बातें 

  • 1996 जारी किए गए 10 रूपये के नोट में महात्मा गाधी के चित्र के साथ पीछे की तरफ वनस्पति को दर्शाता हुआ एक चित्र था। 
  • इसी तरह 1981 में जो नोट जारी किए गए इसमें मोर पक्षी का आर्ट बना हुआ था। 2001 में जारी 20 रूपये के नोट में ताड़ का वृक्ष दिखाया गया था। 
  • और 1983-84 में बुद्ध चक्र यानि कोर्नार्क चक्र की फोटो बनी थी। 1996 में 100 रूपये के नोट में हिमालय का चित्र लिया गया था। 

खास बात 

सिक्कों एवं नोट के संग्रहकर्ता दीपक दास के  अनुसार इनकी छपाई किसी खास अवसर की याद में की जाती है जैसे भारत छोड़ो आन्दोलन या अंबेडकर की जयंती इत्यादि । और दूसरा नियमित छपाई जो एक निश्चित अंतराल में होती है। 

अक्टूबर 1997 में दांडी यात्रा दिखाया गया था। जिसे दाण्डी यात्रा की याद में छापा गया था इस आंदोलन की शुरूआत महात्मागांधी ने 1930 में की थी । जब अंग्रेजों ने नमक पर कर लगाकर कानून बनाया था और कहा था कि नमक पर भी अब भारतीयों को टैक्स देना होगा। 
कोई भी चित्र जो सिक्कों में प्रयोग किये गये है उनमें कुछ न कुछ अर्थ भी निहित होता है। 

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फेस तो फेस 

11/28/2018

इतिहास के सूत्र: बस्तर के मंदिर

मै बस्तर का रहने वाला हूॅ और बस्तर की बात बताता हॅू। प्राचीन बस्तर को अनेक नामें से जाना जाता था । महाकंतार? महअटवि, दण्डकारण्य, भ्रमरकोट, और चित्रकोट ।

दंतेवाडा मंदिर (फोटो अभिषेक )
 एर्राकेट चपका,  केसरपाल, टेमरा, नारायणपाल, गढ़िया, ढोढरेपाल चित्रकोटख् कुरूसपाल सोनारपाल, अड़ेंगा, गढ़ धनोरा  भेंगापाल, समलूर चिंगीतरई छज्ञेटेडोंगर, बड़ेधाराउर बोदरा  छिंदगांव, सिंगनपुर घेटिया, बस्तर, केशकाल, मद्देढ़ , भोपालपट्टनम भेरमगढ़, बारसूर तथा दंतेवाड़ा आदि ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के क्षेत्र है जहां पर पुरवशेष प्राप्त होने का सिलसिला आज भी जारी है।

बस्तर के प्रमुख राजवंश:


पुरातात्विक अभिलेखों से ज्ञात होता है कि यहां लम्बे समय तक नल-नागवंश के शासकों की हुकुमत चलती थी। जो चौदहवीं सताब्दी तक मानी जाती है। दोनों राजवंशों की राजधानी इंदिरावती नदी के तट पर ही थी । नलवंश के बाद बस्तर में छिदंक  नागवंश का शासन काल था। इतिहास कारों की माने तो नाग वंशीय शासन काल में ही मंदिरों का निर्माण हुआ जो आज भैरमगढ दंतेवाड़ा, बारसूर में स्थित है और बस्तर के इतिहास को जानने समझने का सूत्र देते है । 

छिंदक नागवंश के पश्चात बस्तर में चालुक्यवंष ने चौदहवी षताब्दी से लेकर 1947 तक राज्य किया । देष में स्वतंत्रता के बाद जनवरी  1,  1948 को भारत के विभिन्न गणराज्यों  के साथ बस्तर राजतंत्र को भी लोकतंत्र में विलीन कर दिया गया । 
इस ब्लॉग का उद्देष्य है कि आपके समक्ष बस्तर के उन एतिहासिक जगहों के बारें में एक झलक बताना जिन्हें जानने का हर बस्तरवासी को हक है ।

क्या खास है बारसूर में :-


बस्तर के समृद्धशाली इतिहास में बारसूर का विशेष स्थान है। बस्तर के कई राजवशों के उदय और पतन की गाथाएं इतिहास के पन्नों में मिल जाती है।
बारसूर मंदिर (फोटो- अभिषेक )
एक मान्यता के अनुसार बारसूर का नामकरण बाणसुर के नाम पर हुआ। जब आप बारसूर में जाए तो आपको एतिहासिक महत्व के भवन कई जगहों पर मिल जाएंगे । बारसूर में सवत्र प्राचीन प्रतिमाएं विखरी पड़़ी है। यहां के गणें मंरिए पेदम्मा गुड़ी,मामा-भांचा मंदिर, बत्तीसा मंदि, चन्द्रादित्य मंदि पहाड़ी चट्टान पर स्थित हिरमराज मंदि, सोलह खंबा, मावली मंदिर सहित अनगिनत ज्ञात-अज्ञात पुरातात्विक धरोहर मौजूद है। प्रचलित लोक कथा के अनुसार यहां 147 तालाब और उतने ही देवालयों का निर्माण किया गया िा। यहीं कारण है कि आज भी अनेक तालाब और मंदिर अवषेश के रूप  में मौजूद है।

बारसूर में अनेक प्रतिमाए मौजूद है जो छिंदक नाग वंशीय कला की उत्कृष्ट मिसाल देती है । यहां एक छोटे संग्राहलय में षिव-पार्वती, विश्णु, काली भेरव, चामुण्डा, ब्रम्हा, लक्ष्मी गणेश ,दिक्पाल आदि की प्रतिमाएं सुरक्षित रखी गई है। 
बारसूर स्थित पेदम्मगुड़ी जहां कम ही लोग पहूॅचते है। पदम्मा को तेलुगु शब्द है "बड़ी मां" । दंतेश्वरी के एक रूप को पदम्मा यानि बड़ी माई के नाम से भी जाना जाता है। बारसूर में पेदम्मा गुढ़ी मौजूद है जिसमें कहा जाता है कि दंतवाड़ा की दंतेश्वरी की मूर्ति सबसे पहले यहीं स्थापित की गई थी बाद में इसे दंतेवाड़ा ले जाकर स्थापित किया गया ।

दंतेवाड़ाः- 

आज दंतेवाड़ा एक शक्ति पीठ है के रूप् में विख्यात है और दंतेश्वरी देवी को ,देवी दुर्गा का प्रतिरूप मान पूजा की जाती है । देवी मां के मुख मण्डल में अपूर्व तेजस्विता विद्यमान है जिनकी आंखे निर्मित है। गहरे चिकने काले पत्थरों से निर्मित मूर्ति के छः भुजाएं है जिनमें शंख, खड्ग त्रिशूल, घंटा पाश और एक हाथ से राक्षस के बाल पकडे़ हुए  है । मूर्ति का एक पॉव सिंह पर रखा हुआ है । माई जी प्रतिमा के पैरां के समीप राहिनी ओर एक पाद भेरव की मूर्ति तथा बाई ओर भैरवी की मूर्ति स्थापित है माई दंन्तेश्वरी जी के भव्य मूर्ति के पीछे पृष्ठ भाग पर मुकुट के उपर पत्थर से तराशी गई कलाकृति, नरसिंह अवतार के द्वारा हिरण्य कश्यप के संहार का दृश्य है।

इसे भी देखें:- नारायण पाल मंदिर  


11/19/2018

तुलसी विवाह की कहानी

वैसे तो भारत में त्योहारों का सिलसिला सितम्बर में ही शुरू हो जाता है और प्रत्येक त्यौहार का अपना महत्व होता है / तुलसी हम सभी जानते है और इसके औषधीय गुणों से सभी भली- भांति परिचित है /  दीपावली के 11 दिन में हम एक त्यौहार
तुलसी पौधा (फोटो गूगल)
तुलसी पौधे को ही समर्पित करते है जिसे तुलसी विवाह या एकदशी कहा जाता है / इस ब्लॉग के माध्यम से मै आपको तुलसी विवाह मनाये जाने के बारे में बताता हूँ / 





बस्तर में मनाये जाने वाले त्योहारों के बारे में जानने के लिए नीचे  दिए गए लिंक पर क्लिक कीजिये /
नयाखानी क्या है ?  


तुलसी के औषधीय गुणों की वजह से ही आयुर्वेद तुलसी के पत्ते को एक औषधि के रूप में आदि काल से उपयोग करता आया है / अगर तुलसी विवाह के पौराणिक रूप में नज़र डाले तो एक नयी कहानी निकल कर आती है / जिसे यहाँ चर्चा करना ज़रूरी हो जाता है /

कौन थी तुलसी :-

पुराणों  में तुलसी के बारे में ज़िक्र किया गया है / इस में यह कहा गया है कि तुलसी राक्षस कुल में जन्मी के विष्णु भक्त थी / उसका नाम वृंदा था , उसकी भक्ति से भगवान् खुश रहते थे , आगे चल कर उसका विवाह रक्षक कुल में ही जालंधर नाम के राक्षस से हुआ / 

देवता-असुर की लड़ाई:-

एक समय जब एसा आया कि देवता और राक्षसों में जंग छिड़ी , और जालंधर को भी उसमे हिस्सा लेना पड़ा / जब जालंधर लड़ाई में जाने लगा तो तुलसी ने उसे विदा करते समय कहा कि जब तक आप नही लौटेंगे मै आपके लिए पूजा-अर्चना करती रहूंगी !
तुलसी ने वैसा ही किया , तुलसी की भक्ति के बल पर जालंधर देवताओं पर भारी पड़ने लगा और देवता लड़ाई के मोर्चे पर हरने लगे / 
Tulsi plant at the courtyard (Photo-Google)

इधर जालंधर को भी घमंड  हो गया की उसे कोई नही हरा सकता / और वह स्वर्ग की दूसरी कन्याओं पर अत्याचार करने लगा / तब देवताओं ने भगवान् विष्णु के पास जाकर विनती की और कहा की इससे तो मानव जाती का विनाश हो जाएगा और कोई भी नही बचेगा ?  विष्णु ने कहा ये वृंदा की भक्ति की ताकत है जिससे जालंधर की विजय हो रही है /

विष्णु भगवान् का वह कदम:-   

तब विष्णु ने देवताओं की विनती पर ,मानव जाति के लिए जालंधर के रूप लिया और वृंदा के पास गए , वृंदा ने भी अपने पति को सुरक्षित पाकर अपनी प्रार्थना बंद कर दिया /
उधर जालंधर की शक्ति प्रार्थना के बंद होते ही ख़त्म हो गई और वह देवताओं के हाथों मारा गया /

कौन है शालिग्राम:-

भगवान् को पत्थर बनना पड़ा -जब वृंदा को ये बात पता चली तो उसने  गुस्से में भगवान् को श्राप दिया जिससे विष्णु पत्थर के बन गए / भगवान् के पत्थर बनते ही देवताओं में हडकम्प मच गया वे वृंदा के पास जाकर श्राप वापस लेने का अनुरोध करने लगे जिसे वृंदा मान गई और भगवान्  विष्णु को फिर से उसी रूप में आ गए मगर वृंदा के साथ किया गए कृत्य पर वे काफी लज्जित हुए , और वृंदा के श्राप को जिन्दा रखने के लिए अपना एक प्रतिरूप एक पत्थर में भी रखा जिसे शालिगराम कहा जाता है /
Tulsi Vivah (Google-photo)

तुलसी कैसे बनी वृंदा:-

इधर वृंदा श्राप वापस लेने के बाद सती हो गई और उसके चिता की राख से एक पौधा निकला जिसे तुलसी कहते है /
और आगे चलकर वृंदा की मर्यादा और पवित्रता के लिए देवताओं ने तुलसी और शालिग्राम का विवाह कार्तिक शुल्क एकादशी (देव प्रबोधनी एकादशी ) को करा दिया / भगवान् विष्णु ने भी शालिग्राम के रूप में तुलसी को लक्ष्मी से ज्यादा दर्जा दिया और कहा कि मै बिना तुम्हारे कुछ भी खाने की चीज़े स्वीकार नही करूँगा  और इसीलिए बिना तुलसी को चड़ाए भगवान् विष्णु को नही चड़ाया  जाता है / इसीलिए तुलसी का स्थान हमेशा शीर्ष में ही होता है / इसी दिन कार्तिक एकादशी होती है / 
उम्मीद है आपको ये ब्लॉग पसंद आया होगा / अपने कमेंट ज़रूर लिखे ! 


My work

Gauhar Jaan: The Indian Classical Singer

भारत की कौन है पहली रिकॉर्डिंग सुपर स्टार  मै एक एसी गायिका और नृत्यांगना की बात करने जा रहा हूँ जिनके करीब 600 गानों की रिकॉर्डिंग ...