9/25/2018

Story of Jasdev Singh

 आइये जाने आवाज के जादूगर जसदेव सिंह को

आज मै जो कहने जा रहा हु वह बड़ा ही दुखद है खास तौर पर उनके लिए जो पब्लिक स्पीकिंग को संजीदगी से लेते है /
जसदेव सिंह (photo-google)

आज वो आवाज़ खामोश हो गई जो पिछले 48 वर्षों से स्वतंत्रता दिवस, व् गणतंत्र दिवस को अपनी आवाज से सजीव कर देती थी  / मै बात कर रहा हूँ ग्रेट कमेंटेटर जसदेव सिंह की / 87 वर्ष की आयु में जसदेव की आवाज आज सदा के लिए खामोश हो गई / उनके अमूल्य  योगदान को खेल प्रेमी हमेशा याद करेंगे /

चाहे एशियन गेम्स हो या ओलमपिक या अन्य कोई खेल के आयोजन-  वे अपनी शानदार आवाज से खेल की  कमेंट्री में जान डाल देते थे / खेल मानो एसा लगता था कि आँखों के सामने हो रहा  है / ये बात 1980 के पहले की है / जब आज की मॉडर्न तकनीक नही थी न ही चैनलों की भरमार थी /

मै उस वक्त की बात कर रहा हु जब सूचनाओ के लिए रेडियो या दूरदर्शन हुआ करता था और इंदिरा गाँधी के ज़माने से मै उनको सुनता आ रहा हूँ तथा उनको कॉपी करते हुए मैंने भी कमेंट्री की शुरुवात की थी  और मेरे जैसे अनगिनत लोगों ने निश्चित ही उनका अनुसरण किया होगा  /

आज तो देश में कमेंट्री की परिभाषा ही बदल चुकी है जिसमे कमेंट्री की गरिमा कही धूमिल सी हो रही है / आज के दौर में जहाँ हर दिन एक नया कमेंटेटर आता तो ज़रूर है मगेर वो छाप नही छोड़ सका है जो जेसदेव ने छोड़ा /

पुरस्कार एवम सामान :-

भारत सरकार ने उन्हें उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए 1985 में पदम श्री तथा 2008 में पदम भूषण से सम्मनित किया था / 2014 में राजस्थान रत्न से नवाजा गया /
वे दूरदर्शन व आल इंडिया रेडियो एक बहतरीन कमेंटेटर थे / रेडियो पर  80 के दशक में मैच का सही आनन्द जसदेव की कमेंट्री से ही आता था/

जन्म और प्रारंभिक जीवन :-

जसदेव सिंह का जन्म 18 मई 1931 को राजस्थान के बोली गाँव में हुआ और 19 55 से आकाशवाणी जयपुर से उन्होंने बतौर उदघोषक अपने करियर की शुरुवात की /  हालाँकि वे काफी समय जयपुर में ही रहे  खेल आयोजनों की कमेंट्री के वे पहचान बन चुके थे , उन्होंने कमेंट्री को एक नयी परिभाषा दी /

गाँधी जी शवयात्रा की कमेंट्री करने वाले डिमेलो की आवाज ने नन्हे जसदेव सिंह की दिशा ही बदल दी / डिमेलो अंग्रेजी में कमेंट्री कर रहे थे मगर जसदेव को उनका एक एक शब्द अंदर तक भेद रहा था / और यहीं से जन्म हुआ सदी के महान कमेंटेटर जसदेव सिंह का / कहते है तकालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने जसदेव को सुनने लिए लिए सदन की कारवाही रुकवा दी थी /

एसा था जसदेव की आवाज़ का जादू /

नमन उनके निधन पर !

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